अर्नब के मामले में आखिर क्यों चुप हैं हमारे राष्ट्रवादी पत्रकार

क्या आप जानते हैं शिवसेना पर बनाया गया एक कार्टून वत्सऐप्प पर फॉरवर्ड किये जाने के कारण शिवसेना के गुंडों ने एक व्यक्ति को कूट दिया था. महाराष्ट्र में एक पूर्व सैनिक के साथ भी ऐसी ही एक मामले के दौरान उसके घर पर मारपीट कर दी गयी थी. ऐसे में सवाल यह है की आखिर बोलने की आज़ादी वाली गैंग हैं, कहा? आज़ादी गैंग तो छोड़िये खुद को राष्ट्रवादी और निष्पक्ष मीडिया के होने का दावा करने वाले न्यूज़ पत्रकार भी कुछ नहीं बोल रहें. चलो मान लेते हैं की आम लोगों की मारपीट पर TRP उतनी नहीं मिलती. तो फिर आप अपनी ही बिरादरी के देश के जाने माने पत्रकार अर्नब गोस्वामी के लिए भी अगर न बोले तो लोग सवाल करेंगे ही. उदहारण के लिए आप इंडिया टीवी के रजत शर्मा को देख लीजिये उन्होंने अर्नब की गिरफ्तारी पर ट्वीट करते हुए लिखा की, "मैं इनकी पत्रकारिता की शैली से सहमत नहीं" इस ट्वीट के बाद उन्होंने ऐसा ट्वीट किया की सब हैरान हो गए, क्योंकि यह ट्वीट सच में ट्रंप के लिए था या फिर अर्नब के लिए लोग समझ नहीं पाए... रजत ने लिखा की, "उसने मीडिया का उपहास उड़ाया, कैमरा पर झूठ बोला, तमीज़ तक नहीं थी, झूठी लोकप्रियता के ढोल पीटे, और अब चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट उसकी रक्षा करे और मीडिया उसका समर्थन करे. अजीब गुंडा है! हार मानो और निकल जाओ ट्रम्प महोदय." इस ट्वीट को पढ़कर कोई भी समझ सकता था, इस ट्वीट का निशाना ट्रंप नहीं हो सकते. बात रही झूठी TRP की तो वह मुंबई पुलिस द्वारा फैलाई झूठी जानकारी थी. जिस FIR का जिक्र मुंबई पुलिस द्वारा किया जा रहा था, उस FIR में India Today Group का नाम था न की Republic Bharat का. कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल के बेटे ने भी सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार कर लिया था की Republic Bharat ने TRP आंकड़ें बिलकुल सही है और उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं हुई हैं. बात करें रिश्वत देकर TV चलवाने की तो पुरे देश में अलग अलग राज्यों के अलग अलग शहरों में कुछ चुनिंदा घरों में ही यह TRP Moniter Box लगाए जाते हैं. ऐसे में यह कहना की Republic Bharat ने पैसे देकर लोगों को कहा की मेरा चैनल चलाना यह अपने आप में बहुत अजीब बात थी. इसके बावजूद तथाकथित पत्रकार अर्नब का साथ देना तो दूर उसी पर तंज़ रहें हैं.
 

अर्नब के मामले में आखिर क्यों चुप हैं हमारे राष्ट्रवादी पत्रकार

क्या आप जानते हैं शिवसेना पर बनाया गया एक कार्टून वत्सऐप्प पर फॉरवर्ड किये जाने के कारण शिवसेना के गुंडों ने एक व्यक्ति को कूट दिया था. महाराष्ट्र में एक पूर्व सैनिक के साथ भी ऐसी ही एक मामले के दौरान उसके घर पर मारपीट कर दी गयी थी. ऐसे में सवाल यह है की आखिर बोलने की आज़ादी वाली गैंग हैं, कहा? अर्नब के मामले में आखिर क्यों चुप हैं हमारे राष्ट्रवादी पत्रकार आज़ादी गैंग तो छोड़िये खुद को राष्ट्रवादी और निष्पक्ष मीडिया के होने का दावा करने वाले न्यूज़ पत्रकार भी कुछ नहीं बोल रहें. चलो मान लेते हैं की आम लोगों की मारपीट पर TRP उतनी नहीं मिलती. तो फिर आप अपनी ही बिरादरी के देश के जाने माने पत्रकार अर्नब गोस्वामी के लिए भी अगर न बोले तो लोग सवाल करेंगे ही. उदहारण के लिए आप इंडिया टीवी के रजत शर्मा को देख लीजिये उन्होंने अर्नब की गिरफ्तारी पर ट्वीट करते हुए लिखा की, "मैं इनकी पत्रकारिता की शैली से सहमत नहीं" इस ट्वीट के बाद उन्होंने ऐसा ट्वीट किया की सब हैरान हो गए, क्योंकि यह ट्वीट सच में ट्रंप के लिए था या फिर अर्नब के लिए लोग समझ नहीं पाए... रजत ने लिखा की, "उसने मीडिया का उपहास उड़ाया, कैमरा पर झूठ बोला, तमीज़ तक नहीं थी, झूठी लोकप्रियता के ढोल पीटे, और अब चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट उसकी रक्षा करे और मीडिया उसका समर्थन करे. अजीब गुंडा है! हार मानो और निकल जाओ ट्रम्प महोदय." इस ट्वीट को पढ़कर कोई भी समझ सकता था, इस ट्वीट का निशाना ट्रंप नहीं हो सकते. बात रही झूठी TRP की तो वह मुंबई पुलिस द्वारा फैलाई झूठी जानकारी थी. जिस FIR का जिक्र मुंबई पुलिस द्वारा किया जा रहा था, उस FIR में India Today Group का नाम था न की Republic Bharat का. अर्नब के मामले में आखिर क्यों चुप हैं हमारे राष्ट्रवादी पत्रकार कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल के बेटे ने भी सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार कर लिया था की Republic Bharat ने TRP आंकड़ें बिलकुल सही है और उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं हुई हैं. बात करें रिश्वत देकर TV चलवाने की तो पुरे देश में अलग अलग राज्यों के अलग अलग शहरों में कुछ चुनिंदा घरों में ही यह TRP Moniter Box लगाए जाते हैं. ऐसे में यह कहना की Republic Bharat ने पैसे देकर लोगों को कहा की मेरा चैनल चलाना यह अपने आप में बहुत अजीब बात थी. इसके बावजूद तथाकथित पत्रकार अर्नब का साथ देना तो दूर उसी पर तंज़ रहें हैं.