पश्चिम बंगाल में चुनाव को 8 चरणों के लिए लगाई गई थी याचिका, कोर्ट ने की खारिज

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों के लिए याचिका को दायर किया गया था जिसके अंदर अनुरोध किया गया था कि पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में विधानसभा के चुनाव नहीं कराए जाएं क्योंकि इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है! वह आज याचिका में इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को राज्य के अंदर चुनाव प्रचार की मुहिम के दौरान जय श्री राम जैसे धार्मिक नारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए उसको रोक देना चाहिए! ऐसे में अब आज सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका को खारिज कर दिया गया है जिसके अंदर 8 चरणों में विधानसभा चुनाव करवाने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी! इस याचिका को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी राम सुब्रमण्यम की पीठ ने सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया है! ऐसे में पीठ ने शुरुआत में याचिकाकर्ता और वकील एमएल शर्मा से कहा कि वह कोलकाता उच्च न्यायालय के पास चले जाएं इस पर एम एल शर्मा का पेट से कहना था कि मैंने एक फैसले को आधार बनाया है यह चुनावी संबंधी याचिका नहीं है एक दल धार्मिक नारों का इस्तेमाल कर रहा है मुझे उच्च न्यायालय क्यों जाना चाहिए? जब याचिकाकर्ता ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया तो पेट ने साफ कहा है ठीक है हम आपसे सहमत नहीं हैं याचिका को खारिज किया जाता है!
 

पश्चिम बंगाल में चुनाव को 8 चरणों के लिए लगाई गई थी याचिका, कोर्ट ने की खारिज

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों के लिए याचिका को दायर किया गया था जिसके अंदर अनुरोध किया गया था कि पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में विधानसभा के चुनाव नहीं कराए जाएं क्योंकि इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है! वह आज याचिका में इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया था कि भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को राज्य के अंदर चुनाव प्रचार की मुहिम के दौरान जय श्री राम जैसे धार्मिक नारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए उसको रोक देना चाहिए! ऐसे में अब आज सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका को खारिज कर दिया गया है जिसके अंदर 8 चरणों में विधानसभा चुनाव करवाने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी! इस याचिका को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी राम सुब्रमण्यम की पीठ ने सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया है! ऐसे में पीठ ने शुरुआत में याचिकाकर्ता और वकील एमएल शर्मा से कहा कि वह कोलकाता उच्च न्यायालय के पास चले जाएं इस पर एम एल शर्मा का पेट से कहना था कि मैंने एक फैसले को आधार बनाया है यह चुनावी संबंधी याचिका नहीं है एक दल धार्मिक नारों का इस्तेमाल कर रहा है मुझे उच्च न्यायालय क्यों जाना चाहिए? जब याचिकाकर्ता ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया तो पेट ने साफ कहा है ठीक है हम आपसे सहमत नहीं हैं याचिका को खारिज किया जाता है!