इन ऐप्स के साथ न करें ट्रांजेक्शन, वजह जानकर हो जाएँगे हैरान

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भारत में डिजिटल ट्रांसेक्शन (Digital Transactions) को बढ़ावा नोटबंदी के समय पर मिला था, उसके बाद से ही लोगों को डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) करने की ऐसी लत लगी की ज्यादातर लोग तो जेब में कैश रखना ही भूल गए हैं. हालाँकि अभी भी कैश का इस्तेमाल बहुत बड़ी संख्या में होता है लेकिन डिजिटल ट्रांसेक्शन्स का इस्तेमाल भी बहुत और बहुत तेजी बढ़ रहा हैं.

डिजिटल ट्रांसेक्शन जब से आया है तब से ऑनलाइन ट्रांसेक्शन (Online Transactions) करने वाली ऐप्स की भी मानो बाढ़ सी ही आ चुकी हैं. इन ट्रांसेक्शन ऐप्स में कुछ ऐप्स ऐसी भी हैं जो सीधे तौर पर चीन से तालुख रखती हैं. इन्हीं ऐप्स को लेकर अब प्रवर्तन निदेशालय और राज्यों की सीआईडी टीम एक साथ जांच में जुट चुकी हैं.

बताया जा रहा है की स्नैपआईटी लोन, बबल लोन, गो कैश और फ्लिप कैश आदि ऐप्स को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) और राज्यों की सीआईडी टीम ने पेमेंट गेटवे कंपनी रेज़रपे (razorpay) को इन ऐप्स पर ट्रांसेक्शन करने पर रोक लगाने का निर्देश दे दिया हैं. दरअसल यह लोन ऐप है और यह सीधे पेमेंट गेटवे के साथ जुडी हुई हैं.

यही कारण है की प्रवर्तन निदेशालय और राज्यों की सीआईडी टीम को इन ऐप्स में होने वाली ट्रांसेक्शन्स का पता नहीं चल पा रहा. यह लोन ऐप आपको छोटे छोटे लोन देती हैं लेकिन भारी भरकम ब्याज और प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee) के साथ. यानी अगर आप उदाहरण के लिए 10000 का लोन लेते हैं तो आपके बैंक में मात्र 8000 ही ट्रांसफर किये जाएंगे.

बाकी के पैसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर काट लिए जाएंगे, लेकिन जो ब्याज होगा वह 10000 पर ही लगाया जाएगा. इस ब्याज की दर 36 प्रतिशत से शुरू होकर 50 प्रतिशत सालाना तक जाती हैं. यानी अपने लोन लिया 10000 का आपको मिले फिर 8000 और आपको कंपनी को वापिस करने हैं 13600 या फिर 15000 अगर आप यह रकम नहीं लौटा पाए तो आपके फ़ोन में मजूद कांटेक्ट लिस्ट (Contact List) को आपके नाम से मैसेज भेजा जाएगा.

आपको सोशल मीडिया से लेकर आपके रिश्तेदारों के बीच बदनाम किया जाएगा. आपके घर पर फ़र्ज़ी केस के नोटिस भेजे जाएंगे आपको गालियां दी जाएंगी यहां तक की आपके घर गुंडे भेजने की बात भी कही जाएगी. इस तरह से यह लोन ऐप काम करती हैं और इस बदनामी के चलते कुछ लोगों ने आत्महत्या भी की हैं, जिसके बाद से सरकार, RBI, ED और CBI जांच में जुटकर इन ऐप्स के पीछे कंपनीज का पता लगा रही हैं क्योंकि यह ऐप्स जो पैसा लोन के रूप में बाँट रही हैं, वो पैसा कहाँ से आ रहा है और कहां जा रहा है उसका किसी को नहीं पता.

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