कर्नाटक चुनाव जीतने के लिए फिर हिंदुत्व की राह पर चली बीजेपी..

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bjp leans back hindutva karnataka

bjp leans back hindutva karnataka: कर्नाटक चुनाव को लेकर धर्म, जाति हर दांव पर focus किया जा रहा है। जी हां, BJP सूबे के हर समीकरण पर focus कर रही है। यही वजह है कि इस बार फिर से हिंदुत्व की छवि को लेकर BJP सजग हो गई है, जिसके लिए BJP ने पूरा masterplan तैयार कर लिया है। कर्नाटक के हिंदुओं को अपने खेमे में करने के लिए BJP ने कांग्रेस पर न सिर्फ गंभीर गंभीर आरोप लगाये बल्कि पूरी तरह से तैयारियां भी कर लिया है। इसकी झलक अमित शाह से ही देखी जा सकती है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस report में क्या खास है.

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बीजेपी ने कांग्रेस पर शादा निशाना

कर्नाटक में हिंदुत्व की छवि पर जोर देने का आदेश दिया है। इसके लिए BJP के firebrand नेता योगी आदित्यनाथ और बड़े बड़े नेताओं को कर्नाटक में प्रचार करने का आदेश दिया गया है। साथ ही इन नेताओं को अपने चुनावी भाषण में सिर्फ और सिर्फ हिंदुओ पर focus करने को कहा है। इतना ही नहीं, कांग्रेस पर निशाना साधते हुए BJP ने कहा कि कांग्रेस हिंदु विरोधी है, वो सिर्फ मुस्लिम की सहयोगी है, ऐसे में हिदूं सिर्फ और सिर्फ BJP को ही वोट करें। बताते चलें कि BJP अध्यक्ष अमित शाह भी हिंदुत्व की राह पर चलते हुए मंदिर मठ जाते दिखाई दे रहे हैं।

बता दें कि यहां का लिंगायत समुदाय BJP से खफा है। यही वजह है कि इस समुदाय को अपने खेमे में करने के लिए BJP 2014 के बाद एक बार फिर से हिंदुत्व की राह पर चल चुकी है।

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BJP ने इस बार कर्नाटक से कांग्रेस हटाओ का नारा लगाया

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सभी स्टार प्रचारक को यह आदेश दिया गया है कि वो अपने भाषण में हिंदुत्व का खास ख्याल रखे। कर्नाटक में हिंदुओ की संख्या ज्यादा है, जिसकी वजह से कांग्रेस और BJP दोनों ही हिंदुओ को लुभावने में लगी हुई है। कर्नाटक से इस बार कांग्रेस को हटाने के लिए BJP ने विकास और सांप्रदायिक का कार्ड एक साथ खेला है, जिसकी वजह से BJP का कद बढ़ता ही जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष भी हिंदुत्व की छवि पर जोर दे रहे हैं। यही वजह है कि वो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे,

जिसके लिए उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से 15 दिन की छुट्टी मांगी है, ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा कि दोनों ही पार्टियों ने एक ही mastercard खेला है, तो ऐसे में किसका mastercard जनता को भाता है, ये तो खैर वक्त ही बताएगा, लेकिन कर्नाटक जीतना दोनों ही पार्टियों के लिए आसान नहीं है, ऐसे में मामला अब कांटे का हो चुका है।

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