महबूबा सरकार गिरने के बाद मोदी सरकार ले सकती है कश्मीरी पंडितों पर फैसला, पढ़े पूरी खबर

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Mehbooba governments fall: Jammu and Kashmir में 3 साल से चली आ रही PDP-BJP गठबंधन की सरकार 19 जून को तब गिर गई, जब BJP ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया. सरकार गिरने के बाद Kashmir में राज्यपाल शासन लग गया है. इस बारे में लगातार बात हो रही है कि घाटी के हालात अब किस तरफ जाएंगे.

Mehbooba governments fall

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क्या है कश्मीरी पंडितों का हाल

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1989-90 में जब देश में Ram Mandir आंदोलन का जोर था, उस समय Kashmir घाटी में Kashmiri पंडितों पर आतंकवाद का कहर टूटा और बड़ी संख्या में Kashmiri पंडित घाटी छोड़कर चले आए. तब से Kashmiri पंडितों को लेकर भले ही अन्य मंचों पर चर्चा होती रही हो, लेकिन 2018 में देश की संसद के दोनों सदन लोक सभा और राज्य सभा में Kashmiri पंडितों की हालत के बारे में किसी सांसद ने सवाल नहीं उठाया.

हर कश्मीरी विस्थापित मिलती हैं ये सुविधाएं

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9 अगस्त 2016 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में Home Minister Rajnath Singh ने बताया कि Kashmiri पंडितों के विस्थापन के बाद से उन्हें राहत पहुंचाने की लिए सरकारें विभिन्न उपाय करती रही हैं. उन्होंने बताया कि Kashmiri पंडित विस्थापितों को प्रति व्यक्ति 2500 रुपये प्रतिमाह की नकद राहत राशि दी जाती है.

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इसके अलावा हर परिवार के हर व्यक्ति को हर महीने 9 किलो चावल, दो किलो आटा और एक किलो चीनी दी जाती है. राजनाथ ने बताया की PM राहत Package 2004 के तहत Jammu में 2 कमरे वाले 5242 आवास और शेखपुरा बडगाम में 200 Flat बनाए गए हैं.

कश्मीरी पंडितों को आतंकवादियों की धमकी नहीं मिलती

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सरकार से सवाल पूछा गया कि जिन Kashmiri पंडितों ने घाटी नहीं छोड़ी है, उन्हें लगातार चरमपंथियों की ओर से घाटी छोड़ने की धमकी दी जा रही है. इस सवाल के जवाब में 1 अगस्त 2017 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने सदन को आश्वस्त किया था कि घाटी में रह रहे Kashmiri पंडितों को चरमपंथियों की धमकी मिलने का कोई मामला सामने नहीं आया है.

कश्मीरी पंडितों को चाहिए अपना होमलैंड

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सरकार अपनी तरफ से Kashmiri पंडितों के लिए काम बता रही है, लेकिन चरंगू का साफ कहना है कि Kashmiri पंडितों की दो ही मांगें हैं. पहली मांग है Kashmir में Kashmiri पंडितों का अलग Homeland बनना और दूसरी मांग है

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Kashmiri पंडितों पर हुई जुल्म की पूरी जांच होना और दोषियों को सजा मिलना. अगर उनकी दूसरी मांग को देखें तो तो 1989 के नरसंहार में Kashmiri पंडितों की हत्या के 176 मामले दर्ज किए गए.

फिर धूमिल पड़ रही घर वापसी की उम्मीद

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Kashmiri पंडितों को PM मोदी सरकार से बहुत आशाएं थीं. लेकिन इस साल 19 मई को PM मोदी Kashmir के बांदीपुरा में Kishanganga Power Project का उद्घाटन करने गए और वे Srinagar में भी एक कार्यक्रम में शामिल हुए. लेकिन Kashmiri पंडितों को लेकर उन्होंने कोई खास घोषणा नहीं की. लेकिन PM ने Kashmiri पंडितों का नाम तक नहीं लिया.

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