अहोई अष्टमी, क्या है जानें, कब है इसका महत्व

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Ahoi Ashtami importance

Ahoi Ashtami importance : आपकी जानकारी के लिए बता दे की अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण की अष्टमी तिथि को रहा जाता है ! इस अहोई माता की पूजा की जाती है ! इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपनी संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती है ! जिन लोगो को संतान नहीं हो पा रही है उनके लिए व्रत बहुत ही ज्यादा ज़रूरी है ! जिनकी संतान दीर्घायु न होती हो , या गर्भ में ही नष्ट हो जाती हो , उनके लिए भी ये व्रत शुभकारी होता है ! ये उपवास आयुकारक और सौभाग्यकारक होता है. इस बार अहोई अष्टमी 31 अक्टूबर को है.

Ahoi Ashtami importance : 

कैसे रखें इस दिन उपवास?

सुबह सुबह नाहा कर अहोई की पूजा का संकल्प करे !

अहोई माता की आकृति, गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनाएं

सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरम्भ करे

पूजा की सामग्री में एक चंडी या सफ़ेद धातु की अहोई , चाँदी की मोती की माला , जल से भरा हुआ कलश , दूध भात , हलवा और पुष्प , दिप आदि रखे !

पहले अहोई माता की, रोली, पुष्प, दीप से पूजा करें, उन्हें दूध भात अर्पित करें

उसके बाद हाथ में गेहू के साथ दाने और कुछ दक्षिणा (बयाना) लेकर अहोई की कथा सुनें

कथा ख़तम होने के बाद माला गले में पहन ले और गेहू के दाने तथा बयाना सासु माँ को देकर उनका आशीर्वाद ले !

अब चन्द्रमा को देखकर भोजन ग्रहण करें

फिर वो चाँदी की माला को दिवाली के दिन निकले और जल के छोटे देकर सुरक्षित रख ले !

अहोई अष्टमी व्रत के विशेष प्रयोग

अगर संतान की शिक्षा, करियर, रोजगार में बाधा आ रही हो

अहोई माता को पूजन के दौरान दूध-भात और लाल फूल अर्पित करें

इसके बाद लाल फूल हाथ में लेकर संतान के करियर और शिक्षा की प्रार्थना करें

संतान को अपने हाथों से दूध भात खिलाएं

फिर लाल फूल अपनी संतान के हाथों में दे दें और फूल को सुरक्षित रखने को कहें

अगर संतान के वैवाहिक या पारिवारिक जीवन में बाधा आ रही हो

अहोई माता को गुड का भोग लगाए और एक चांदी की चैन अर्पित करे !

माँ पार्वती के मंत्र – “ॐ ह्रीं उमाये नमः” 108 बार जाप करें

संतान को गुड खिलाएं और अपने हाथों से उसके गले में चेन पहनाएं

अपनी संतान के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दें

अगर संतान को संतान नहीं हो पा रही हो

अहोई माता और शिव जी को दूध भात का भोग लगायें

चांदी की नौ मोतियाँ लेकर लाल धागे में पिरो कर माला बनायें

अहोई माता को माला चढ़ाये और संतान को संतान प्राप्ति की प्रार्थना करे !

पूजा के उपरान्त अपनी संतान और उसके जीवन साथी को दूध भात खिलाएं

अगर आपके बेटे को संतान नहीं हो रही हो तो बहु को और बेटी को संतान नहीं हो पा रही हो तो बेटी को मामला धारण करवाएं

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